उत्तरकाशी: वनाग्नि सुरक्षा हेतु विशेष कार्यशाला का आयोजन

कार्यशाला

उत्तरकाशी। वन चेतना केन्द्र, पुरोला में वनाग्नि सुरक्षा के तहत वायरलेस ऑपरेटर्स, मास्टर कन्ट्रोल रुम प्रभारी तथा वनाग्नि रिपोर्टिंग से जुड़े कर्मचारियों हेतु एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया ।
टौंस वन प्रभाग, अपर यमुना वन प्रभाग एवं गोविंद वन्य जीव प्रभाग, उत्तरकाशी के समस्त वनक्षेत्राधिकारियों, वन दरोगा, वन बीट अधिकारियों, कंप्यूटर ऑपरेटर्स एवं अन्य कर्मचारियों, एनजीओ के प्रतिनिधियों व पत्रकारों द्वारा प्रतिभाग किया गया।
कार्यशाला में वन मुख्यालय, देहरादून से आये मास्टर ट्रेनर्स संजय पुरोहित, दीपराज, इंकिता शर्मा व रमेश खत्री द्वारा वनाग्नि नियंत्रण, वायरलेस ऑपरेटिंग सिस्टम, मास्टर कन्ट्रोल रुम प्रभारी हेतु आवश्यक रिपोर्टिंग का प्रेषण, आदि जानकारी दी गई।

उत्तराखंड वन विभाग ने एक अत्याधुनिक फॉरेस्ट फायर एप्लिकेशन विकसित किया है, जो जंगल की आग की घटनाओं का तुरंत पता लगाकर तेजी से प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगा।
वन विभाग द्वारा विकसित इस एप्लिकेशन में रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और त्वरित अलर्ट सिस्टम जैसी कई अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया है। इससे वन विभाग की टीमों को आग लगने की सूचना तुरंत मिल सकेगी और वे समय पर वहाँ पहुंचकर आग बुझाने के काम कर सकेंगे।

कार्यशाला

एप्लिकेशन में लगा है अलर्ट सिस्टम
इस एप्लिकेशन में एक अत्याधुनिक अलर्ट सिस्टम लगाया गया है, जो जंगल में आग लगते ही संबंधित वनकर्मियों को तुरंत सूचना भेजता है। आग की तीव्रता और स्थान के आधार पर यह सूचना वन विभाग के अधिकारियों और फील्ड टीमों को दी जाती है ताकि वे तत्काल प्रतिक्रिया दे सकें।

एप्लिकेशन में रंग-आधारित संकेत प्रणाली का उपयोग किया गया है, जिससे आग की स्थिति को आसानी से समझा जा सकता है। इस सिस्टम की मदद से वन अधिकारियों को यह समझने में आसानी होगी कि किसी विशेष क्षेत्र में आग बुझाने की प्रक्रिया किस स्तर तक पहुंच चुकी है।

लाल रंग – आग लगी है और फैल रही है।
पीला रंग – वनकर्मी आग वाले स्थान पर पहुंच चुके हैं।
हरा रंग – आग को सफलतापूर्वक बुझा दिया गया है।

इस एप्लिकेशन को अग्निशमन वाहनों से जोड़ा गया है-
वन विभाग ने इस एप्लिकेशन को राज्यभर के 7,000 से अधिक वन कर्मचारियों और 40 से अधिक अग्निशमन वाहनों से जोड़ा है। इससे वन विभाग की टीमें तेजी से आग प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगी और नुकसान को कम करने के लिए तत्काल कार्रवाई कर सकेंगी।

इस एप्लिकेशन को विकसित करने में भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी वैभव सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने कई वर्षों तक इस समस्या का अध्ययन किया और 2020 से 2022 के बीच रुद्रप्रयाग जिले में प्रायोगिक परीक्षण करके इसे अधिक प्रभावी बनाया। उनके इस प्रयास से अब उत्तराखंड के जंगलों में लगने वाली आग पर तेजी से काबू पाया जा सकेगा।

इस कार्यशाला को वन मुख्यालय से निशांत वर्मा, अपर प्रमुख वन संरक्षक, वनाग्नि एवं आपदा प्रबंधन के मार्गदर्शन में सहयोगी संस्था गंगोत्री कौशल विकास एवं उत्थान समिति, देहरादून के सहयोग से आयोजित किया गया।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here