स्थानीय निकायों की कर राजस्व में हिस्सेदारी 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव
ब्लॉक प्रमुखों का मानदेय-भत्ता बढ़ेगा
प्रमुख संगठन सम्मेलन में मुख्यमंत्री धामी की चार घोषणाएं
ग्रामीण आजीविका मिशन की ब्लॉक स्तरीय समिति में भी शामिल होंगे ब्लॉक प्रमुख
स्थानीय निकायों की कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश की क्षेत्र पंचायतों को आर्थिक और प्रशासनिक रूप से सशक्त बनाने के लिए चार महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। क्षेत्र पंचायत निधि को दोबारा शुरू करने और पंचायत प्रतिनिधियों के मानदेय एवं भत्तों में वृद्धि के लिए कार्यवाही की जाएगी।
इसके अलावा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन की विकासखंड स्तरीय समिति में ब्लॉक प्रमुखों को शामिल करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों को नगरीय निकायों में शामिल करने से पहले संबंधित ग्राम पंचायत से विचार-विमर्श करने का निर्णय लिया गया है।
रविवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित उत्तराखण्ड प्रमुख संगठन सम्मेलन-2026 में मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास में ब्लॉक प्रमुखों और पंचायत प्रतिनिधियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। वे सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में उनकी भागीदारी अहम है। जनप्रतिनिधियों की समस्याओं और मांगों पर संबंधित विभागों के साथ विचार-विमर्श कर समाधान की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार अंत्योदय की भावना के साथ काम कर रही है। सरकार का उद्देश्य विकास योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान के माध्यम से शासन-प्रशासन को सीधे जनता के बीच पहुंचाया गया। इससे हजारों लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला और अनेक समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान हुआ।

उन्होंने बताया कि छठे राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अनुसार स्थानीय निकायों की राज्य के कर राजस्व में हिस्सेदारी 10.5 प्रतिशत से बढ़ाकर 12.5 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए अनुपूरक बजट में 721 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इससे ग्रामीण और शहरी निकायों को विकास कार्यों के लिए अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध होंगे। पंचायत भवनों से वंचित ग्राम पंचायतों में चरणबद्ध तरीके से भवन निर्माण कराने का भी प्रयास किया जा रहा है।
धामी ने कहा कि विकसित उत्तराखण्ड का लक्ष्य गांवों को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाकर ही हासिल किया जा सकता है। राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में होमस्टे, पर्यटन, कृषि, बागवानी, पशुपालन और स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहित कर रही है। उनके अनुसार प्रदेश में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने में पंचायत प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के विभिन्न निर्णयों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तराखण्ड समान नागरिक संहिता लागू करने वाला स्वतंत्र भारत का पहला राज्य बना है। प्रदेश में धर्मांतरण विरोधी, दंगारोधी और नकल विरोधी कानून लागू किए गए हैं। सरकारी भूमि को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के लिए अभियान चलाया गया है। स्थानीय लोगों के हितों की रक्षा के लिए सख्त भू-कानून लागू किया गया है। भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के प्रयासों से प्रदेश के 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है।
उन्होंने कहा कि केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में मास्टर प्लान के तहत विकास कार्य किए जा रहे हैं। केदारखंड और मानसखंड के प्रमुख मंदिरों के विकास के साथ गोल्ज्यू कॉरिडोर, यमुना कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा रहा है। शीतकालीन यात्रा को प्रोत्साहित कर पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और स्थानीय लोगों के लिए वर्षभर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों और लखपति दीदी अभियान के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की बात कही। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से सरकारी योजनाओं की जानकारी जन-जन तक पहुंचाने और पात्र लोगों को लाभान्वित कराने में सहयोग की अपील की।
उन्होंने कहा कि पंचायतों को मिलने वाली धनराशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी से होना चाहिए। विकास कार्य निर्धारित समय पर पूरे हों और उनकी गुणवत्ता से समझौता न किया जाए। प्रदेश के विकास में सभी जनप्रतिनिधियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
सम्मेलन में ब्लॉक प्रमुख संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राजीव कण्डारी, महासचिव गणेश चन्दोला, ज्योति ग्रोवर, संरक्षक हरीश बिष्ट सहित विभिन्न क्षेत्रों के ब्लॉक प्रमुख और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।












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