काशीपुर किसान आत्महत्या – दो दारोगा निलंबित, 10 सिपाही लाइन हाजिर
देखें, सुसाइड से पहले का वीडियो
पुलिस जमीन के धंधे में लिप्त – कांग्रेस
हल्द्वानी/देहरादून। चार करोड़ के जमीन फ्रॉड से परेशान काशीपुर के किसान की आत्महत्या ने
सरकारी तंत्र की संवेदनशीलता और भू माफिया के बोलबाले पर कई सवाल खड़े कर दिए है।
सोमवार को एसएसपी ने दो दारोगा कुंदन सिंह रौतेला और प्रकाश बिष्ट को निलंबित कर दिया। सीएम ने मामले की मजिस्ट्रीयल जांच के आदेश दिए हैं।
अंकिता हत्याकांड की जारी तपन के बीच काशीपुर के युवा किसान की आत्महत्या नोट में पुलिस विभाग और दो दर्जन से अधिक प्रॉपर्टी डीलर पर उंगलियां उठ रही है।
आत्महत्या से पहले
सुखवंत सिंह ने अपने मार्मिक वीडियो में स्पष्ट कहा कि उनके साथ चार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी हुई। जब वह न्याय की आस लेकर थाने पहुँचे, तो उनका आरोप है कि थाना प्रभारी और एसपी स्तर तक पुलिस अधिकारियों ने शिकायत सुनने के बजाय पैसे लेकर दूसरे पक्ष का साथ दिया, पीड़ित को डराया-धमकाया गया, बार-बार थाने बुलाकर प्रताड़ित किया गया और अंततः उन्हें पूरी तरह हताश कर दिया गया।
वीडियो बयान कर बाद सुखवंत ने होटल के कमरे में गोली मारकर आत्महत्या कर ली। और नौ पेज के सुसाइड नोट व लगभग 5 मिनट के वीडियो में अपनी आपबीती में कई लोगों का नाम लिया है। इनमें तीन पुलिस अधिकारियों के नाम भी शामिल हैं। कहा कि, उसके साथ पुलिस के अधिकारियों ने दुर्व्यवहार किया। और थाने से भगाया। सुखवंत ने पुलिस विभाग पर भ्र्ष्टाचार के आरोप भो लगाए।
किसान सुखवंत के परिजन सदमे में है। उनकी पत्नी प्रदीप कौर व किशोर पुत्र की कॉउंसलिंग करवाई जा रही है।
ज़मीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में सामने आई खबरों के बाद न सिर्फ़ प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हुई, बल्कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटना की जांच के आदेश दे दिए।साथ ही यह भी कहा गया कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

किसान सुखवंत लंबे समय से आर्थिक दबाव और अन्य समस्याओं से जूझ रहे थे। स्थानीय स्तर पर कई बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें समय पर राहत नहीं मिल पाई। अंततः उन्होंने यह आत्मघाती कदम उठाया, जिससे पूरा क्षेत्र शोक में डूब गया।
कुछ दिन पहले हिस्ट्रीशीटर विनय त्यागी की पुलिस हिरासत में दिनदहाड़े हुई हत्या के मामले में भी परिजनों ने उत्तराखंड पुलिस पर गम्भीर सवाल उठाए थे। यह भी सामने आया था कि बदमाश गोली मारने के बाद आराम से चले गए। और पुलिस के जवान रायफल हाथ में होने के बाद भी गोली नहीं चला पाए। परिजनों ने इस रहस्यमय हत्याकांड में 750 करोड़ के मामले को उजागर कर एन एच के एक ठेकेदार, चिकित्सक व पुलिस की भूमिका को निशाने पर लिया था।
अंकिता भंडारी हत्या, विनय त्यागी हत्याकांड के बाद किसान सुखवंत की आत्महत्या ने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को नया मुद्दा थमा दिया था।
चौकी पैगा, कोतवाली आईटीआई पर नियुक्त निम्नलिखित अधिकारी एवं कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर किया गया है—
उपनिरीक्षक/चौकी प्रभारी जितेन्द्र कुमार,
अ0उ0नि0 सोमवीर सिंह,
आरक्षी 327 ना0पु0 भूपेन्द्र सिंह,
आरक्षी 690 ना0पु0 दिनेश तिवारी,
मु0आरक्षी 154 ना0पु0 शेखर बनकोटी,
आरक्षी 501 ना0पु0 सुरेश चन्द्र,
आरक्षी 392 ना0पु0 योगेश चौधरी,
आरक्षी 60 ना0पु0 राजेन्द्र गिरी,
आरक्षी 298 ना0पु0 दीपक प्रसाद
आरक्षी 159 ना0पु0 संजय कुमार।
कांग्रेस ने किया विरोध
उधर, नेता विपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि
प्रदेश की कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। उत्तराखंड पुलिस आज कानून की रखवाली छोड़कर जमीन के धंधों और सत्तासंरक्षित लेन-देन में उलझ चुकी है इसका एक भयावह उदाहरण काशीपुर से सामने आया है, जहाँ एक किसान सुखवंत सिंह ने न्याय न मिलने की पीड़ा में वीडियो जारी कर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली।

उन्होंने कहा कि यह कोई साधारण घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था के नैतिक पतन का जीवंत प्रमाण है। ये वारदात भाजपा सरकार की नाकामी और राज्य में व्याप्त भ्रष्ट कानून-व्यवस्था का सबूत है।
कांग्रेस नेता आर्य ने कहा कि यह घटना किसी एक थाने या एक जिले की नहीं है, यह सरकार की कार्यशैली और उत्तराखंड पुलिस के गिरते भरोसे पर तमाचा है। हम लगातार चेतावनी देते रहे हैं कि प्रदेश भय और अन्याय की ओर बढ़ रहा है आज वही चेतावनी एक मौत में बदल चुकी है।
सत्ता में बैठे लोगों को समझना होगा कि कुर्सी स्थायी नहीं होती, लेकिन अन्याय का हिसाब इतिहास जरूर लेता है।
यह पूरी घटना उत्तराखंड सरकार और पुलिस प्रशासन के माथे पर कलंक है।













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