कब सुधरेंगे पहाड़ो की स्वास्थ्य सेवाओं के हाल..?

बरसात के मौसम में नदी नाले उफान पर होते हैं, इस पर सड़कों का अभाव पहाड़ी जीवन को और मुश्किल बना देता है. ऐसा ही कुछ टिहरी की धनौल्टी विधानसभा क्षेत्र में देखने को मिला.

 

सड़क के अभाव में एक और बीमार महिला को कंधों पर उठाकर 10 किलोमीटर पैदल चलकर सड़क तक पहुंचाया गया. उसके बाद सड़क से मरीज को देहरादून अस्पताल पहुंचाया गया.

 

इन हालातों के बीच जनप्रतिनिधियों से लेकर स्थानीय अफसरों को चाहिए कि थोड़ा जनता की तरफ भी नजरें डाले ताकि जनता का जीवन थोड़ा आसान हो सके.

 

सकलाना पंचायत के सेरा गांव की सरू देवी की देर रात अचानक तबीयत बिगड़ गयी. रास्ता बंद होने से ग्रामीणों ने उन्हें चारपाई पर लिटाकर उबड़ खाबड़ रास्तों से होकर 10 Km. पैदल चलकर सौदना सड़क तक पहुंचाया.

 

उसके बाद देहरादून हॉस्पिटल तक पहुंचाया गया. हैरत की बात है कि सौंग घाटी क्षेत्र में एक भी हॉस्पिटल नहीं है. स्थानीयों की माने तों यहां के लोगों का जीवन बहुत संघर्षपूर्ण है.

 

सौंग घाटी क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क जैसी सुविधा नहीं है और ना अस्पताल और बैंक की सुविधा है. घुड़साल के पूर्व प्रधान जय सिंह कंडारी बताते हैं कि सौंग बांध परियोजना के अधूरे कार्य से ग्रामीणों को बहुत परेशानी हो रही है.

 

22 जून को पैदल चलकर अस्पताल पहुंची थी प्रसूता

 

धनौल्टी के लग्गा गोठ की अंजू देवी 22 जून की रात प्रसव पीड़ा सहते हुए 5 घंटे का पैदल सफर तय कर अस्पताल पहुंचीं.

 

ऐसे में बड़ा सवाल है कि आजादी के 75 सालों के बाद भी धनौल्टी लग्गा गोठ के ग्रामीण सड़क सुविधा से वंचित हैं, लेकिन शासन-प्रशासन के अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं.

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